श्री राम मंदिर ट्रस्ट में क्षत्रियों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया?

#ऐसा प्रतीत होता है कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट के गठन में संघ की ही भूमिका महत्वपूर्ण रही है| सरकार ने तो केवल श्री राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा की औपचारिकता पूर्ण की है|
       संघ से जुड़े क्षत्रियों के लिए  भी यह विचारणीय एवं चिंतनीय भी होना चाहिए कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट में क्षत्रियों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया?
        संगठन से जुड़े  क्षत्रियों को इतना भी अनुशासन नहीं मानना चाहिए कि अनुशासन के नाम पर आपको पूरी तरह से उपेक्षित करके खत्म ही कर दिया जाए|

जब राममन्दिर ट्रस्ट में समाजिक समरसता के नाम पर ब्राह्राम्ण वैश्य शुद्र नारी सबको शामिल  किया गया हैं तो हम क्षत्रियो को इससे पुन्य कार्य के भागी होने से सरकार ने क्यो वंचित कर रखा | क्या यह जातीय आधार  पर भेदभाव के श्रेणी में नहीं आता | क्या यही संघ का समाजिक समरस्ता और संतुलन हैं |

क्या राम मन्दिर आन्दोलन में अभिन्न और अतुल्यनीय भूमिका निभाने  वाले #विश्व_हिन्दू_परिषद के संस्थापक #मेवाड़_नरेश  स्व #भगवंत_सिंह_राणा   के परिवारिक सदस्य ट्रस्ट में  शामिल करने योग्य नहीं थे ???

भद्री नरेश बड़े राजा आदरणीय #उदयप्रताप_सिंह   , स्व  #दिलीप_सिंह_जूदेव ( महाराज जशपुर राजपरिवार छत्तीसगढ़  )   का राममन्दिर आन्दोलन  महत्वपूर्ण भूमिका थी ,  या उन अयोध्या उस पावन भूमि के सूर्यवंशीय क्षत्रिय जो आज 700 वर्षो से छत्र और पगड़ी और मोजड़ी धारण नहीं करते और अपने पूर्वजो की प्रतिज्ञा पीढ़ी दर पीढ़ी कर रहे हैं ,क्या उनमे से कोई इस ट्रस्ट शामिल होने की योग्यता नहीं रखता ,क्या उनके त्याग और बलिदान का कोई औचित्य नहीं   भारत सरकार जवाब दे ....??
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